जननायक बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उलीहुत में हुआ था पिता का नाम सुगना मुंडा
जननायक बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उलीहुत में हुआ था पिता का नाम सुगना मुंडा और माता का नाम कर्मी था बिरसा के पूर्वज चूटू मुंडा और नागु मुंडा थे पूर्ति गोत्र के थे रांची के उपनगर चुटिया में रहा करते थे कहा जाता है कि इन दो भाइयों के नाम से इस क्षेत्र का नाम छोटानागपुर पड़ा बिरसा वंशजों की आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ी हुई थी उन्होंने अपने समाज के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज उठाई तो जमीदार ठेकेदार सरदार आदि इनके दुश्मन बन गए प्रारंभ में आंदोलन आर्थिक मांग के आधार पर लड़ा गया परंतु बाद में इस आंदोलन का स्वरूप सामाजिक धार्मिक तथा राजनीतिक हो गया बिरसा मुंडा ने खुद को भगवान का दूध घोषित किया और अपने समर्थकों से कहा कि महाजनों ठेकेदारों ईसाइयों और जमींदारों का कत्लेआम करें क्योंकि जमीदारों द्वारा इनकी जमीन हड़पी जा रही थी जिससे ऋण के दुष्चक्र में फस गए थे बिरसा मुंडा मुंडा समुदाय को संगठित किया और खुद को ईश्वर का अवतार बताकर कुशल नेतृत्व किया राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय होने पर सरकार बिरसा को गिरफ्तार करने का संयंत्र करने लगी योजना अनुसार बिरसा के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 353 505 के अधीन गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया निर्देशानुसार पुलिस पार्टी चलकद की ओर रवाना हो गई क्योंकि उस वक्त बिरसा मुंडा चलकत में ही थे पार्टी तीसरे पहर 3:00 बजे बंद गांव से 14 मील की दुर्गम रास्ते तय कर चलकत पहुंची और बिना किसी झंझट के बिरसा को गिरफ्तार कर लिया गया और 4:00 बजे शाम रांची लाया गया उसे कमिश्नर के सामने पेश किया गया शाम को करीब 7:00 बजे बिरसा मुंडा जी को जेल भेज दिया गया बिरसा मुंडा जी पर मुकदमा चला विरसा व अन्य अभियुक्तों को सीआरपीसी की धारा 505 के अधीन 19 नवंबर 1895 को दोषी ठहराया गया सजा सुनाए जाने के बाद बिरसा को रांची की जेल से हजारीबाग जेल भेज दिया गया सजा खत्म होने के बाद 30 नवंबर 1897 को जेल से रिहा किया गया बिरसा के अनुयायियों ने रांची जिले के खूंटी ,कुर्रा, तोरपा, तमाड़ और बसिया थाना के अंतर्गत विद्रोह किया बिरसा मुंडा जी और उनके साथी गोली का जवाब तीन और मसाज से देते रहे अंततः 3 जनवरी 1900 को बिरसा मुंडा जी को पकड़ लिया गया और उन्हें रांची जेल भेज दिया गया और 9 जून 1900 कि सुबह 9:00 बजे अचानक जेल में मृत्यु हो गई कहा जाता है कि उनकी मृत्यु हैजा प्रकोप से हुई किंतु संभावना यह भी व्यक्त की जा रही है उन्हें जहर देकर मार दिया गया बिरसा आंदोलन के परिणाम स्वरूप 1908 को छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम बना इस प्रकार से बिरसा मुंडा जी ने अपना इतिहास रचा एडवोकेट सुरेंद्र कुमार आजाद सिविल कोर्ट लखीमपुर खीरी 9984840818
