September 14, 2026

तमिल साहित्य विशेषज्ञों, सांस्कृतिक प्रतिनिधियों व छात्रों सहित कुल 216 लोगों का दल काशी पहुंचा। योगी आदित्यनाथ और श्री धर्मेन्द्र प्रधान नमो घाट से संयुक्त रूप से आज करेंगे काशी तमिल संगमम् 4.0 का उद्घाटन

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आज काशी तमिल संगमम 4.0 की पहली विशेष ट्रेन 216 प्रतिनिधियों के साथ वाराणसी पहुंची। इस प्रतिनिधिमंडल में 50 तमिल साहित्य विशेषज्ञ, 54 सांस्कृतिक विद्वान, साथ ही छात्र, शिक्षक, कारीगर, शास्त्रीय गायक, तथा आध्यात्मिक ग्रंथों के आचार्य और विद्यार्थी शामिल हैं। काशी की पावन धरती पर कदम रखते ही सभी के चेहरे पर मुस्कान और उत्साह देखने को मिला। यह शुरुआत केटीएस 4.0 कार्यक्रम की व्यापक रूपरेखा का हिस्सा है, जो तमिलनाडु से लगभग 1400 प्रतिनिधियों को उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के भ्रमण के लिए आमंत्रित करता है। जिस क्षण की हमें प्रतीक्षा थी, वह आ चुका है…काशी तमिल संगमम् आज से प्रारंभ हो रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान आज वाराणसी के नमो घाट से काशी-तमिल संगमम के इस चौथे संस्करण का संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे। वाराणसी प्रवास के दौरान ये छात्र गंगा घाटों, प्रमुख धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों से संवाद के माध्यम से उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक धरोहर, जीवन शैली और आध्यात्मिक विरासत का निकट से अनुभव करेंगे। इस कार्यक्रम के तहत सेमिनार, संवाद सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, साहित्यिक विमर्श, स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प से परिचय जैसी विविध गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। छात्रों को काशी के महत्वपूर्ण तमिल धरोहर स्थलों का भी भ्रमण कराया जाएगा, जिसमें महाकवि सुब्रह्मण्य भारती का पैतृक निवास, काशी मदम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर शामिल हैं।इन प्रतिनिधियों के अलावा आज काशी तमिल संगमम् 4.0 के तहत तमिलनाडु से पत्रकारों का एक दल कवरेज के लिए भी वाराणसी पहुंचा। केटीएस 4.0 में शामिल होने पहुंचे तमिलनाडु की मीडिया टीम ने सुबह-सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर में भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। काशी तमिल संगमम् 4.0 का यह आयोजन उत्तर और दक्षिण की सांस्कृतिक एकता को सशक्त रूप में आगे बढ़ा रहा है। इस वर्ष के संगमम् का विषय है “चलो तमिल सीखें – तमिल करकलाम” जो इस संदेश को रेखांकित करता है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार की हैं। इस पहल का उद्देश्य तमिल भाषा और संस्कृति को देश के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना है, जो एकता का प्रतीक है। साथ ही, प्राचीन तमिल ग्रंथों के प्रसार को अन्य भारतीय भाषाओं में प्रोत्साहित करके उनकी पहुँच का विस्तार करना भी इसका लक्ष्य है।


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