बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर, अगली सरकार से रिश्तों की रणनीति अहम
बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर, अगली सरकार से रिश्तों की रणनीति अहम। बांग्लादेश में आज आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव के बाद भारत को मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की जगह एक चुनी हुई स्थायी सरकार से बातचीत करनी होगी। ऐसे में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय करने में यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शेख हसीना के कार्यकाल (2009-2024) में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सहयोगी रहे, खासकर भारत के पूर्वोत्तर में उग्रवाद पर नियंत्रण को लेकर। अब नई सरकार का रुख भारत की सुरक्षा और कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। इस चुनाव में आवामी लीग शामिल नहीं है। मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के बीच माना जा रहा है। बीएनपी को पारंपरिक राष्ट्रवादी दल, जमात को मजबूत इस्लामिक ताकत और एनसीपी को छात्र आंदोलन से उभरी नई राजनीतिक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव नतीजों के बाद यह साफ होगा कि बांग्लादेश की अगली सरकार भारत को किस नजरिये से देखती है और दोनों देशों के रिश्तों में आगे किस तरह का बदलाव आता है।
