उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा और विधानसभा की दो सीटों के उप-चुनावों को लेकर बड़ा संदेश देने की कोशिश में भाजपा और सपा
उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा और विधानसभा की दो सीटों के उप-चुनावों को लेकर बड़ा संदेश देने की कोशिश में भाजपा और सपा
इन दिनों उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा और विधानसभा की दो सीटों के उप-चुनावों को लेकर कुछ ज्यादा ही सरगर्मी है। चूंकि इस चुनाव से बसपा और कांग्रेस दूर हैं, इसलिए सीधी लड़ाई में तीनों ही सीटों के नतीजों से भाजपा और सपा बड़ा संदेश देने की कोशिश में हैं। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ‘नेताजी’ के निधन से रिक्त जिस मैनपुरी लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहे हैं, वह वर्ष 1996 से सपा का गढ़ मानी जाती रही है,भारतीय जनता पार्टी आज तक यह सीट नहीं जीत सकी। जिस मैनपुरी सीट से मुलायम पांच बार सांसद रहे, अब उस राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए उनकी पुत्रवधू डिंपल यादव चुनाव मैदान में हैं। मुलायम के न रहने पर सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए यह उपचुनाव पहली चुनौती है, इसलिए उन्होंने मैनपुरी सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए किसी और के बजाय कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद रह चुकीं अपनी पत्नी पर ही दांव लगाया है।
