January 13, 2026

भारत के राष्ट्रपति ने एम्स गोरखपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आज (30 जून, 2025) उत्तर प्रदेश के


यूपी :गोरखपुर में एम्स गोरखपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में भाग लिया।इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स का नाम सुनते ही मन में विश्वस्तरीय इलाज, बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक तकनीक और समर्पित डॉक्टरों की छवि उभरती है। एम्स संस्थान भारत के चिकित्सा सामर्थ्य के प्रतीक हैं, जहां हर मरीज को उम्मीद की नई किरण दिखाई देती है। एम्स ने भारत में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में उच्चतम मानक स्थापित किए हैं। चाहे सर्जरी की नई तकनीक हो, शुरुआती निदान के लिए उपकरण हों या आयुष और एलोपैथी के संयोजन से बीमारियों का इलाज हो, एम्स ने नवाचार को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया है। यह कहा जा सकता है कि सभी एम्स संस्थान देश के पहले एम्स की स्थापना के उद्देश्य को पूरा करने में सफल रहे हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स गोरखपुर और देश के अन्य एम्स की स्थापना देश के हर कोने में उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के उद्देश्य से की गई है। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि एम्स गोरखपुर ने बहुत कम समय में शिक्षा, शोध और चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि यह संस्थान हर वर्ग के नागरिकों को सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। एम्स गोरखपुर बिहार और नेपाल की सीमा से लगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हो रहा है।राष्ट्रपति ने कहा कि समाज और देश के विकास में डॉक्टरों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे न केवल बीमारियों का इलाज करते हैं बल्कि स्वस्थ समाज की नींव भी रखते हैं। स्वस्थ नागरिक राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बन सकते हैं। उन्होंने युवा डॉक्टरों से समाज के उन वर्गों के लिए काम करने का आग्रह किया जिन्हें चिकित्सा सेवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि कई ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अभी भी वंचित समुदायों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे इस बारे में सोचेंगे और ऐसे क्षेत्रों और लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में काम करेंगे।राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टरों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सहानुभूति के महत्व को समझना महत्वपूर्ण है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे भविष्य के डॉक्टरों को शुरू से ही ऐसा माहौल उपलब्ध कराएं, जिसमें वे डॉक्टर-रोगी संवाद, उपचार और विश्वास निर्माण में सहानुभूति की भूमिका जैसे विषयों के साथ-साथ अपने कौशल के बारे में जानें और उन्हें अपनी कार्यशैली में अपनाएं। उन्होंने डॉक्टरों को सलाह दी कि वे अपने करियर और जीवन में हमेशा याद रखें कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि मानवता की सेवा है। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि वे करुणा और ईमानदारी को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाएं।


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