September 14, 2026

मासूम के गले में फंसा ₹5 का सिक्का, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने ‘बिना चीरे’ के निकाला, बचाई जान

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​लखीमपुर खीरी:​अस्पताल के गलियारे में मां-बाप की सांसें अटकी हुई थीं, 3 साल का मासूम दर्द से बेहाल था और सामने चुनौती थी भोजन नली में फंसा पांच रुपये का सिक्का। लेकिन स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (सम्बद्ध जिला चिकित्सालय मोतीपुर) की टीम ने महज 120 मिनट के भीतर जो कर दिखाया, उसने न सिर्फ एक मासूम को नई जिंदगी दी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की मुस्तैदी की एक बेहतरीन मिसाल भी पेश की।प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज लखीमपुर डॉ वाणी गुप्ता ने बताया कि ​सोमवार सुबह करीब 11:00 बजे परिजन अपने 3 वर्षीय बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे, उनके अनुसार बच्चे ने खेलते-खेलते पाँच रुपए का सिक्का निगल लिया है। ई एन टी, ओ पी डी में मौजूद असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मनोज शर्मा ने बिना वक्त गंवाए तुरंत एक्स-रे कराया, और सिक्के का स्थान और गंभीरता की जानकारी ली, सिक्का भोजन नली (Esophagus) के शुरुआती हिस्से में फंसा पाया गया। मामला गंभीर था, क्योंकि थोड़ी सी भी देरी बच्चे की सांसों पर भारी पड़ सकती थी।प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता के कुशल नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने मोर्चा संभाला और ​अस्पताल प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत आपरेशन कक्ष में बच्चे को वरीयता क्रम में सबसे ऊपर रखते हुए तयारियाँ चालू करी।असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता वर्मा (निशचेतक), असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा और स्टाफ नर्स रेखा सैनी एवं पूरी टीम ने ऑपरेशन थिएटर (OT) में, ​दोपहर 12:45 बजे बच्चे को सुरक्षित बेहोशी (Anesthesia) दी एवं दूरबीन विधि (Endoscopy) का इस्तेमाल किया, और बिना कोई चीरा या टांका लगाए कुछ ही मिनटों में भोजन नली से वह सिक्का सुरक्षित बाहर निकाल लिया।​महज 2 घंटे में सब कुछ फाइनल! प्रधानाचार्य डॉ वाणी गुप्ता ने बताया कि सुबह 11 बजे बच्चे का अस्पताल आना, जांच होना, ऑपरेशन की तैयारी और दोपहर 01 बजे से पहले सिक्का बाहर निकालकर परिजनों को सौंप देना—संस्थान की तत्परता और बेजोड़ टीमवर्क की कहानी खुद बयां करता है।​परिजनों ने जताया डॉक्टरों का आभार। ​सिक्का हाथ में आते ही माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान लौट आई और उन्होंने राहत की सांस ली। परिजनों ने डॉक्टरों को ‘भगवान’ बताते हुए पूरी मेडिकल टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।​इस सफल ऑपरेशन पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि संस्थान क्षेत्र के लोगों को उत्कृष्ट और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है और यह सफल केस इसी कड़ी का एक हिस्सा है।


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