अदालतों की सख्त फटकार के बाद अब जाकर वन विभाग और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने ज़मीनी कार्रवाई शुरू की है,
देहरादून :अदालतों की सख्त फटकार के बाद अब जाकर वन विभाग और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने ज़मीनी कार्रवाई शुरू की है, जिसने उनकी अपनी सुस्त कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यदि इन विभागों का निगरानी तंत्र मजबूत होता, तो पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील ढलानों पर बिना अनुमति के रातों-रात बड़े होटल और कमर्शियल प्रोजेक्ट खड़े ही नहीं हो पाते। इन अवैध निर्माणों के या तो नक्शे पास नहीं थे, या फिर वे आवासीय श्रेणी के थे।यह प्रशासनिक ढिलाई ही थी जिसके कारण सजग नागरिकों को मजबूरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसके बाद उत्तराखंड हाई कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया और सख्त रुख अपनाया। अदालतों की इस सख्ती के बाद स्थानीय प्रशासन ने आखिरकार स्वीकार किया है कि पहाड़ों पर अवैध निर्माण बड़े पैमाने पर बढ़ा है।
