January 13, 2026

उत्तर प्रदेश के एडेड डिग्री कालेजों के स्ववित्तपोषित शिक्षकों का शोषण व उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं डॉ दिलीप शुक्ला


उत्तर प्रदेश के एडेड डिग्री कालेजों के स्ववित्तपोषित शिक्षकों का शोषण व उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं डॉ दिलीप शुक्ला विश्वविद्यालयों की सरपरस्ती में प्राचार्य प्रबन्धको द्वारा किया जा रहा है एडेड डिग्री कालेजों में स्ववित्तपोषित शिक्षकों का शोषण व उत्पीड़न राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित उप्र सरकार, शासन, निदेशालय, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों व सभी विश्वविद्यालयों से किया गया हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग गोण्डा : उत्तर प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षकों के हो रहे शोषण उत्पीड़न एवं मानवाधिकार के उलंघन के प्रकरण से मानवाधिकार सुरक्षा संगठन उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक एवं एलबीयस पीजी कॉलेज गोण्डा के रसायन विज्ञान के अनुमोदित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ दिलीप शुक्ला द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष मानवाधिकार आयोग भारत सरकार सहित राष्ट्रीय अध्यक्ष मानवाधिकार सुरक्षा संगठन, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा उत्तर प्रदेश, निदेशक उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज, समस्त क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों, समस्त कुलपति व कुलसचिव राज्य विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश को रजिस्टर्ड डाक द्वारा पत्र भेज कर अवगत कराया जा चुका है।डॉ शुक्ला के अनुसार प्रदेश के 331 अनुदानित अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों (एडेड डिग्री कालेजों) में से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम संचालित 272 एडेड डिग्री कालेजों में महाविद्यालय प्राचार्यो व प्रबन्धको की मिली भगत से नियम कानून व आदेश निर्देश एवं शासनादेशो की धज्जियां उड़ाते हुए स्ववित्तपोषित शिक्षकों को मरने के लिए मजबूर कर दिया गया है। वैश्विक महामारी कोरोनाकाल में प्रधानमंत्री भारत सरकार के निर्देशों व उत्तर प्रदेश सरकार व शासन द्वारा जारी शासनादेशो व अध्यादेशों के बावजूद प्राचार्य प्रबन्धको द्वारा आपदा में अवसर की परिणति के तहत वेतन की कटौती,वेतन रोकना, ईपीएफ कटौती, ईपीएफ रोकना, निष्कासित करना व महाविद्यालय छोड़ने की धमकी देना आये दिन की नियत बन चुकी है। डॉ शुक्ला द्वारा अपने प्रेषित पत्र से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत सरकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित सभी उच्च अधिकारियों को यह अवगत कराया गया कि यह कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश सरकार के विधि विधान व नियम कानून के अनुपालन के लिए नियुक्त कार्यवाहक प्राचार्यों ने महाविद्यालय प्रबन्धको की चापलूसी व चरणबन्दना में स्वयं के जमीर को गिरवी रख दिया है। महाविद्यालय प्रबन्धको की लूट खसोट व शोषण एवं उत्पीड़न के भागीदार बन चुके हैं। वास्तविक हकीकत से कोसों दूर जाकर छात्र संख्या की कमीं का कल्पित बहाना बनाकर आपदा में अवसर देखकर स्ववित्तपोषित शिक्षकों का शोषण किया जा रहा है। प्रदेश संयोजक ने स्पष्ट किया कि यदि एक महीने के अन्दर सभी सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा त्वरित संज्ञान लेकर स्ववित्तपोषित शिक्षकों के हो रहे मानवाधिकार उलंघन व कटौती किये वेतन व ईपीएफ का भुगतान सुनिश्चित नहीं जाता है तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष से व्यक्तिगत मुलाकात कर सम्पूर्ण स्थित से अवगत कराया जायेगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष, मानवाधिकार अधिकार आयोग भारत सरकार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, मानवाधिकार सुरक्षा संगठन भारत, राज्यपाल/कुलाधिपति राज्य विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, निदेशक उच्च शिक्षा, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कानपुर, आगरा, मेरठ लखनऊ वाराणसी, गोरखपुर बरेली प्रयागराज एवं झांसी तथा कुलपति/कुलसचिव चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा, गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्धार्थनगर, डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या, बीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय वाराणसी, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी, रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली, जननायक चन्द्र शेखर सिंह विश्वविद्यालय बलिया, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर एवं प्रयागराज राज्य विश्वविद्यालय प्रयागराज को पत्र प्रेषित किया जा चुका है।


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