सबका स्वार्थ सबकी राजनीति
विषय-सबका स्वार्थ सबकी राजनीति:लोकनायक जयप्रकाश नारायण और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया तथा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर आदि महापुरुषों ने हमारे देश को बहुत कुछ देकर चले गए लेकिन “शायद इन सबने कहां होगा कि जो लोग आज मेरी बात नहीं सुनते शायद मेरे मरने के बाद जरूर सुनेंगे”आज जब भारत चीन संबंधों की बात हो या गुंडागर्दी भ्रष्टाचार तानाशाही आदि समस्याएं छाई हुई है तब यह साफ जाहिर होता है कि वह कितने सही थे दिल्ली के रामलीला मैदान में 1962 की लड़ाई में शहीद सैनिकों के बलिदान का स्मरण करने के लिए एक समारोह आयोजित किया गया था जिसमें तात्कालिक प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु जी उपस्थित थे जिस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर ने गाना गाया इस गीत को सुनकर पंडित जवाहरलाल नेहरु की आंखों में आंसू आ गए अगले दिन समाचार पत्रों में छपी तस्वीर को देखकर”डॉ राम मनोहर लोहिया आग बबूला हो गए कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरु की आंखों में आंसू कायरता का प्रतीक है आंसू के बजाय प्रतिशोध में उनकी आंखें लाल होना चाहिए थी”क्योंकि चीन के रहो यह से डॉक्टर राम मनोहर लोहिया खुश नहीं थे चीन के मामले में भारत सरकार की नीति शुरू से ही कमजोर रही है डॉ राम मनोहर लोहिया इस पर जोर दिया था कि जब दक्षिण भारत की 1947 वाली सीमा से पीछे नहीं हट जाता तब तक सरकार को उससे कोई समझौता नहीं करना चाहिए डॉ राम मनोहर लोहिया का वक्तव्य स्मरण योग्य है जैसे सरकारें पहले थी वैसे आज है यकीनन इस विवाद को कोई निपटाना नहीं चाहता डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि गांधीवादी कार्यकर्ता तीन भागों में बटे हुए हैं सरकारी, मठाधीश और कुजात खुद को कुजात गांधीवादी मानते थे जिसे गांधी वादियों के कुनबे से बाहर कर दिया गया स्वतंत्रता के बाद ही उनका कांग्रेस पार्टी और पंडित जवाहरलाल नेहरू से मोहभंग हो गया था उनका मानना था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के तौर तरीकों से ना तो समाजवादी समाज की संरचना बन सकती है और ना ही गांधी जी का ग्राम स्वराज सपना पूरा हो सकता है लिहाजा वह अपने तमाम साथियों के साथ कांग्रेश से बाहर निकल गए और पंडित जवाहरलाल नेहरू की भाषा भारती विदेश कृषि उद्योग सभी नीतियों की कटु आलोचना के केंद्र बिंदु बन कर उभरे उनके नेतृत्व में 1967 में अंग्रेजी हटाओ आंदोलन समूचे भारत में फैला था जयप्रकाश नारायण भारत के पहले समाजवादी नेता थे जिन्होंने संपूर्ण क्रांति (राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, वैदिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक) का नारा देकर इंदिरा गांधी की सरकार का तख्ता पलट कर गैर कांग्रेसी सरकार बनाने वाले पहले समाजवादी नेता थे जयप्रकाश नारायण का कहना था कि सरकारों का काम सिर्फ जनकल्याणकारी होना चाहिए आर्थिक असमानता के साथ-साथ डॉ राम मनोहर लोहिया ने सामाजिक विषमता के विरुद्ध भी बड़ा अभियान चलाया 1967 के आम चुनाव में उन्होंने राजमाता विजय राजे सिंधिया के मुकाबले एक बाल्मीकि महिला सुखो रानी को खड़ा कर जाति विषमता की जड़ों पर कड़ा प्रहार किया था उन्हीं के दौर में काका कालेलकर आयोग बना था “डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि छोटी जाति वालों को ऊंची जगहों पर बैठा लो पहले इन वर्गों को अवसर मिलेगा तभी उनमें योग्यता विकसित होगी 24 अगस्त 1956 को अपने एक पत्र में डॉ राम मनोहर लोहिया ने बाबासाहेब को स्वयं एक पत्र लिखा था”कहा कि यदि हम और आप मिलकर एक साथ काम करें यह काम बहुत जल्द ही संभव हो जाएगा दुर्भाग्यवश डॉ भीमराव अंबेडकर साहब का 6 दिसंबर 1956 को निधन हो गया यह अच्छा कार्य नहीं हो सका उधर डॉक्टर लोहिया भी जीवन के मात्र 57 वर्ष ही पूरे कर पाए कि 12 अक्टूबर 1967 को अचानक उनकी मृत्यु हो गई जिससे समूची राजनीति में जैसे विराम लग गया और आज भी डॉ राम मनोहर लोहिया और बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के सामने अधूरे पड़े हुए देश में जोर पकड़ रहा समूचा समाजवादी आंदोलन और बहुजन समाज का आंदोलन असमय निष्प्रभावी हो गया आज डॉ राम मनोहर लोहिया डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और जयप्रकाश नारायण के अनुयायियों के लिए यह बहुत आवश्यक है कि उनके विचारों को अमल में लाने के लिए सक्रिय हो जाएं और सब समाज की सरकार बनाएं जिससे सब का भला हो सके।
एडवोकेट सुरेंद्र कुमार आजाद
सिविल कोर्ट लखीमपुर खीरी 9984840818
