प्राचीन काल का इतिहास
प्राचीन काल का इतिहास
प्राचीन काल में बिहार राज्य को मगध और राजधानी पटना को पाटिलीपुुत्र तथा अयोध्या को साकेत और ओडिशा राज्य को कलिंग के नाम से जाना जाता था| मौर्य वंश के बौद्ध शासक सम्राट अशोक के पोते और मौर्य वंश के अन्तिम व दसवें बौद्ध सम्राट बृहदर्थ मौर्य जी थे| बृहदर्थ मौर्य का सेनापति पुष्यमित्र शुंग एक ब्राह्मण था| उसने राजा साहेब को धोखा देकर उनकी हत्या कर दी थी और राजा के शव को दहन करवा दिया था तथा उनके पत्नी और बच्चों को राज्य से बाहर निकलवा दिया था वारदात उस पापी ने बृहदर्थ मौर्य की हत्या कर खुद मगध का सम्राट बना और राजधानी पाटिलीपुुत्र को हटाकर साकेत को बनाया था| साकेत नगरी एक बौद्ध तीर्थ था जो भगवान बुद्ध की शिष्या चीवरदानी विशाखा का घर था| वहाँ पर सम्राट अशोक जी ने कई बुद्ध विहार, स्तूप और शिलालेखों का निर्माण कराया था| बृहदर्थ मौर्य जी की हत्या के बाद भारत की स्थिति खराब हो गई और धीरे- धीरे मौर्य वंश का पतन हो गया था| पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य वंश का पतन कर शुंग वंश की स्थापना की और भारत में बौद्ध धर्म को खत्म कर दिया| उसने सम्राट अशोक के बनाये हुए सभी बुद्ध विहार, स्तूप और स्तम्भों को नष्ट कर जला दिया था तथा बौद्ध ग्रन्थों को जलाकर बौद्ध धर्म का इतिहास मिटा दिया था| उसने बौद्ध गुरूओं को मारकर उनका गर्दन सरयू नदी में बहा दिया और बौद्धों का कत्लेआम कर उन्हें हिन्दू बनाने मजबूर कर दिया था| इस कारण बौद्ध धर्म भारत देश से खत्म हो गया था| बृहदर्थ मौर्य की हत्या के पर इन ब्राह्मणों ने झूठी कहानी रचकर हमारे समाज को भटका दिया और सम्राट बृहदर्थ मौर्य को एक अत्याचारी राक्षस रावण का नाम देकर और पुष्यमित्र शुंग ब्राह्मण को विष्णु का अवतार बताकर श्री राम बताया और झूठी कहानी लिखकर रामायण की रचना की ताकि हमारा बहुजन समाज इस सच्चाई को जान न पाये| और साकेत नगरी का नाम बदलकर अयोध्या रख दिया अयोध्या का मतलब बिना युद्ध की जीती हुई साकेत नगरी| मौर्य वंश के दस राजाओं को दशानन रावण बताकर एक राक्षस के रूप में प्रस्तुत कर दिया तथा पुष्यमित्र शुंग को श्री राम बताकर दुनिया के सामने भगवान का स्वरूप प्रदान कर दिया| इस कहानी को झूठा इतिहास रचकर रामायण की रचना की गई थी और इन ब्राह्मणों ने बुराई को अच्छाई और अच्छाई को बुराई बताकर दुनिया के सामने दशहरा त्यौहार बनाकर खड़ा कर दिया| आज दशहरा है, दशहरा का मतलब मौर्य वंश के दस सम्राटों को हराकर दश+ हरा= दशहरा त्योहार बनाया गया था आज हम रावण का पुतला जलाते हैं, रावण और कोई नहीं ब्लकि मौर्य वंश के दस सम्राटों का सिर बनाकर एक राक्षस रावण के रूप में जलाया जाता है| सिद्धार्थ नागवर बौद्ध की तरफ से बृहदर्थ मौर्य जी बलिदान दिवस पर सम्राट बृहदर्थ मौर्य जी को सुमन अर्पित श्रद्धांजलि।
