कहानी धरती पुत्र मुलायम समाजवादी नेता की
कहानी धरती पुत्र मुलायम समाजवादी नेता की। समाजवादी पार्टी के बारे में सबसे ज्यादा बारीकियां यदि कोई जानता है तो वहां है प्रोफेसर रामगोपाल यादव रामगोपाल यादव को पता था कि मुलायम सिंह यादव अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहते हैं लेकिन शिवपाल सिंह नहीं चाहते थे 5 जनवरी 2017 को तय हुआ कि समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा 4 जनवरी 2017 की शाम को चिट्ठी लिखी गई की पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमई नंदा सभा को संबोधित करेंगे किरणमय नंदा मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी नेताओं में से थे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे मुलायम सिंह यादव ने उन्हें राज्यसभा में भेजा मंत्री भी बनाया मूलता वह पश्चिम बंगाल के निवासी थे पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष पार्टी की अध्यक्षता कर सकता है मुलायम सिंह यादव ने अपने पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं से कहा कि वह सम्मेलन में शामिल ना हो लेकिन एक पत्रकार ने शिवपाल सिंह यादव से फोन कर पूछा तो उन्होंने कहा 30 -40 से माननीय मुलायम सिंह यादव के साथ रहे हैं यदि मुलायम सिंह यादव ने कहा है की पार्टी में किसी को नहीं जाना है तो निश्चित तौर से ही सबको जाना है समाजवादी पार्टी अनुशासन हीन हीं पार्टी है मुलायम सिंह अपील करते हैं कि मेरे पार्टी के नेता सभा में शामिल ना हो मुलायम सिंह की दिली इच्छा थी कि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को ही बनाया जाए मुलायम सिंह यादव के किसी भी नेता से संबंध खराब नहीं थे और सब से अपना काम करवा लेते थे और सबका काम कर भी देते थे एक बार मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता का फोन आया उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी का ठेका इन्हें मिलना चाहिए पार्टी के तमाम नेता नाराज हुई तो मुलायम सिंह यादव ने बड़ी सावधानी से उन्हें समझाया कहा कि हम चाहते तो उन्हें कामना देते लेकिन दिल्ली से एक बहुत बड़े नेता का फोन आया है आप सबको और बहुत सारे काम मिल जाएंगे उसको भी काम दे देते हैं ऐसे थे मुलायम सिंह यादव यही कारण है कि उन्हें आज भी हर आदमी उन्हें सम्मान से देखता है क्योंकि वह संबंधों को बरकार रखते थे आप उन्हें पसंद करें या ना करें लेकिन उनके दाव पेज को समझ पाना मुश्किल है मुलायम सिंह यादव कहते हैं कि जमीन पर लगी फसल देखकर वह बता सकते हैं कि हम किस जनपद में है और उस मिट्टी का रंग देख कर बता देंगे कि वह क्षेत्र कौन सा है 70% मुलायम सिंह जो सोचते हैं वही करते हैं कहते हैं की असली नेतागिरी तो वही है जो सदन तक हमें पहुंचाए उन्होंने 2004 में कहा था कि 2007 में सपा की सरकार नहीं बनेगी इसके बाद शपथ पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी और ऐसा ही हुआ एक बार पत्रकार महोदय ने आजम खान साहब से पूछा कि आप मुलायम सिंह यादव से नाराज चल रहे हैं तो आजम खान साहब ने कहा हमारे नाच नखरे मुलायम सिंह ही उठा सकते हैं और किसी की औकात नहीं है इसलिए हम रूठ भी जाते हैं नेताजी हमें मना भी लेते हैं मुलायम सिंह यादव जनेश्वर मिश्र का बहुत सम्मान करते थे क्योंकि उनसे उम्र में भी बड़े थे और वह चाहते थे कि मुलायम सिंह के बाद समाजवादी पार्टी का उत्तराधिकारी उनका बेटा अखिलेश यादव बने एक बार की बात है कि दिल्ली में नेताजी के पास एक मौलाना साहब टिकट मांगने के लिए गए तीन से चार सौ मौलानाओं को लेकर मुलायम सिंह से मिलाया मुलायम सिंह ने कहा कि मुझ पर दबाव बना रहे हो मौलाना साहब यहां से भाग जाओ अन्यथा इतने मुकदमे लिखवा लूंगा नेतागिरी करने के लायक नहीं बचोगे यह तो बात सच है कि मुलायम सिंह किसी के दबाव की राजनीति नहीं करते थे साफ-सुथरी राजनीति करते थे और जो कहते थे वही करते थे मुलायम सिंह कहते थे कि उसकी योग्यता और मेहनत को देखकर टिकट उनके घर पहुंचा दिया जाए बहुत दूर दृष्टि वाले थे आजमगढ़ के निजामाबाद के विधायक कभी नेता जी के घर नहीं आए मुलायम सिंह यादव उनका टिकट उनके घर पहुंचा देते थे को हर बार जीत कर भी आते थे मनमोहन सिंह की सरकार समाजवादी पार्टी के समर्थन से ही बनी इतना ही नहीं मुलायम सिंह ने एपीजे अब्दुल कलाम, प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति बनाने में अहम भूमिका निभाई थी उन्होंने अपने समकक्ष नेताओं को बहुत सम्मान और तवज्जो दी नेता जी कभी चापलूसी से गिरे नहीं बल्कि खुद चापलूसी करके अपना काम करवा लेते थे मुलायम सिंह जब भी सफर पर निकलते तो दो से तीन नेता साथ में होते थे और वह जानबूझकर यह कोशिश करते थे कि कोई यादव चेहरा ना हो दिल्ली में अमर सिंह, इलाहाबाद में रेवती रमण सिंह, पश्चिम में आजम खान अलग-अलग प्रकार के अलग-अलग जाति के नेताओं को लेकर ओ सफर करते थे ताकि संतुलन बना रहे मुलायम सिंह यादव इतने संघर्षशील थे कि उन्होंने साइकिल चलाकर साइकिल की सरकार बनाई अब उनके उत्तराधिकारी अखिलेश सिंह यादव गाड़ी से चलकर साइकिल की सरकार बनाने में लगे हुए अब देखना यह है कि क्या वह अपने पिता के पद चिन्हों पर चल पाते हैं या उनके सपने को अधूरा छोड़ देते हैं मुलायम सिंह यादव यकीनन एक जमीनी एक किसान एक समाजवादी एक संघर्षशील नेता थे उनकी बराबरी करना उनके दांवपेच को समझ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है लेकिन जो कुछ भी हो करते थे समाज हित और देश हित में करते थे यही कारण है की मुश्किल से मुश्किल दौर में देश की जनता ने उन्हें स्वीकार किया और इस ओहदे तक पहुंचाने का काम किया। एडवोकेट सुरेंद्र कुमार आजाद सिविल कोर्ट लखीमपुर खीरी
