आरक्षण के सहारे दलित और आदिवासी समाज में बदलाव
आरक्षण के सहारे दलित और आदिवासी समाज में बदलाव।आज से ठीक 100 साल पहले 1920-30 दौरान महात्मा गांधी की सबसे बड़ी समस्या अंग्रेज तो थे ही उनमें से उनके लिए डॉ भीमराव अंबेडकर भी सबसे बड़ी समस्या थे अंबेडकर साहब दलित आदिवासी समाज में वंचित लोगों की पैरवी करने के पक्षधर में थे ,तो महात्मा गांधी सिर्फ अंग्रेजों को भगाना चाहते थे, ” एक पत्रकार ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर से पूछा कि अगर देश और अंग्रेजों के हित के बारे में चुनना हो तो आप किससे चुनेंगे तो अंबेडकर ने जवाब दिया देश को, दूसरा सवाल- देश और दलितों के बारे में अगर चुनना हो तो आप पहले किसे चुनेंगे डॉक्टर अंबेडकर ने जवाब दिया दलितों को” इस प्रकार से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर समाज के दलित आदिवासी शोषित वंचित समाज की लड़ाई लड़े थे, आमतौर पर आरक्षण का दुख यह है कि कोई वंचित वर्ग से पढ़ लिख लेता है अपने ही वर्ग से कन्नी काट लेता है; आरक्षण का सुख यह है वंचित वर्ग के लोग भी सत्ता में आने लगे ,जैसे एक गांव में वंचित वर्ग का एक बच्चा आईएएस, आईपीएस, सांसद व विधायक बन जाता है तो पूरे समुदाय को उस बच्चे पर गर्व हो जाता है आरक्षण के वित्तीय लाभ तो उस व्यक्ति को ही मिलते हैं लेकिन सामाजिक लाभ पूरे गांव, पूरे कुनबे, पूरे समुदाय को मिलते हैं कि हमारे गांव का वह लड़का आईएएस, आईपीएस ,सांसद, विधायक बन गया है गांव के आसपास के तमाम वंचित वर्ग के लोगों को गर्व हो जाता है यदि किसी ने हमारा कुछ नुकसान किया तो हमारी मदद करेंगे और करते हैं इस प्रकार से आरक्षण के माध्यम से वंचित लोगों को सामाजिक राजनीतिक आर्थिक रूप से सहयोग मिलता है दूसरी विडंबना यह है कि जब दलित समुदाय का व्यक्ति आगे बढ़ता है तो वह कोशिश करता है कि उसकी शादी स्वर्ण जाति से हो, अंबेडकर चाहते तो वह भी शानदार नौकरी कर सकते थे महलों में रह सकते थे लेकिन उन्होंने अपने समाज को बचाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया उन्हें तमाम प्रकार की छुआछूत का सामना करना पड़ा इससे क्षुब्ध होकर उन्होंने अपने इरादे बदल लिए और समाज को एक नई दिशा दी, आज हमारे बीच डॉक्टर भीमराव अंबेडकर साहब तो नहीं है लेकिन उन्होंने संविधान के माध्यम से जो हमें अधिकार दिए हैं उनके सहारे हम सब अपने समाज को बचा सकते हैं समाज में पनप रहे भेदभाव को मिटाएं और उनके सपनों को पूरा करें। एडवोकेट सुरेंद्र कुमार आजाद सिविल कोर्ट लखीमपुर खीरी।
